Ishwar Ki Nekiyan

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ये झील, झरने, नदी , ये सागर, ये चाँद, सूरज ये कहकशाँ भी,
ये ऊँचे पर्वत , हसीन वादी , ज़मीन भी और ये आसमाँ भी!!

सभी खु़दा की ही नेमते हैं , उन्होंने बख़्शी हैं हम सभी को,
महकते गुलशन, चटकती कलियाँ, मचलते भौंरे ये तितलियाँ भी!!

चमकती पूनम की रात उजली, कभी अमावस की रात काली,
टपकती शबनम, बरसते बादल, कड़कती जोरों से बिजलियाँ भी!!

कभी ठिठुरती सी शीत ऋतु है, कभी है पतझड़, कभी बहारें,
बरसती पावस की हैं फुहारें, शरीर झुलसाती गर्मियाँ भी!!

मदिर हवायें, बिहसते उपवन, हजार किस्मों के फल दिये हैं,
ये सब कृपा है परमपिता की, यही हैं ईश्वर की नेकियाँ भी!!

******* भूषण  ********

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